Contents
- 1 भारत–रूस मित्रता : नये आयाम, नयी चुनौतियाँ और नये अवसर
- 1.1 प्रस्तावना : दशकों पुरानी दोस्ती, नये दौर का एजेंडा
- 1.2 भारत–रूस संबंधों की ऐतिहासिक नींव
- 1.3 व्यापार और अर्थव्यवस्था : रिकॉर्ड स्तर और नये लक्ष्य
- 1.4 ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा : नये रणनीतिक स्तंभ
- 1.5 रक्षा और सुरक्षा : पारंपरिक स्तंभ, नये रूप में
- 1.6 कनेक्टिविटी के नये रास्ते : INSTC और चेन्नई–व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर
- 1.7 बहुपक्षीय मंचों पर भारत–रूस की साझेदारी
- 1.8 संस्कृति, शिक्षा और People-to-People संपर्क : दोस्ती का मानवीय पक्ष
- 1.9 नयी चुनौतियाँ : संतुलन, प्रतिबंध और व्यापार असंतुलन
- 1.10 भारत–रूस मित्रता के नये आयाम : भविष्य का रोडमैप
- 1.11 निष्कर्ष : भरोसेमंद दोस्ती के नए अध्याय
भारत–रूस मित्रता : नये आयाम, नयी चुनौतियाँ और नये अवसर
(लेख: डॉ. नितीन पवार, शिरुर, पुणे, भारत)
” भारत–रूस मित्रता के इतिहास, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और नये आयामों पर विस्तृत विश्लेषण। 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य और चुनौतियाँ।”
प्रस्तावना : दशकों पुरानी दोस्ती, नये दौर का एजेंडा
भारत–रूस संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही भरोसेमंद मित्रता का प्रतीक हैं। शीत युद्ध के दौर में सोवियत संघ ने भारत की औद्योगिक, रक्षा और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी रूस ने भारत को “समय-परीक्षित मित्र” की तरह सहयोग दिया।
साल 2000 में “भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी” और 2010 में “विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के रूप में इस रिश्ते को नया संस्थागत ढांचा मिला। आज जब दुनिया बहुध्रुवीय (multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, भारत और रूस खुद को ऐसे दो ध्रुव के रूप में देखते हैं जो आपसी सहयोग के साथ संतुलित विश्व-व्यवस्था का समर्थन करते हैं।
हाल के वर्षों में, खासकर ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, भारत–रूस मित्रता नये आयाम ग्रहण कर रही है। यह लेख इन्हीं नये आयामों, अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण करता है – साथ ही SEO-अनुकूल (SEO-friendly) ढंग से लिखा गया है ताकि आपका लेख Google सर्च में बेहतर रैंक कर सके।

भारत–रूस संबंधों की ऐतिहासिक नींव
शीत युद्ध से रणनीतिक साझेदारी तक
- 1950–60 के दशक से सोवियत संघ ने भारत की भारी उद्योग, इस्पात संयंत्र, ऊर्जा परियोजनाओं और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सहयोग दिया।
- 1971 की भारत–सोवियत शांति एवं मैत्री संधि ने सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग को औपचारिक रूप दिया।
- 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भी रूस ने भारत के साथ निकटता बनाए रखी और 2000 में रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के साथ रिश्ते को आधुनिक रूप दिया।
“विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी”
2010 में रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान इस साझेदारी को “Special and Privileged Strategic Partnership” का दर्जा मिला। इसका अर्थ है कि दोनों देश केवल औपचारिक साझेदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, बहु-आयामी और संस्थागत सहयोगी हैं।
- वार्षिक शिखर सम्मेलन (Annual Summit)
- उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय वार्ताएँ
- रक्षा, व्यापार, विज्ञान–प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा के लिए अलग–अलग आयोग
ये सभी तंत्र इस मित्रता को गहराई और स्थायित्व प्रदान करते हैं।
व्यापार और अर्थव्यवस्था : रिकॉर्ड स्तर और नये लक्ष्य
रिकॉर्ड द्विपक्षीय व्यापार
भारत–रूस व्यापार ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व छलांग लगाई है।
- 1995 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.4 अरब डॉलर था।
- 2024–25 के वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर लगभग 68.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया, यानी पाँच साल में लगभग सात गुना वृद्धि।
- इसमें भारतीय निर्यात लगभग 4.88 अरब डॉलर और आयात लगभग 63.84 अरब डॉलर रहे, यानी व्यापार संतुलन अभी रूस के पक्ष में है।
मुख्य आयात (रूस से भारत):
- कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद
- कोयला
- उर्वरक
- रक्षा उपकरण और कल–पुर्ज़े
मुख्य निर्यात (भारत से रूस):
- फ़ार्मास्यूटिकल्स (दवाएँ)
- मशीनरी और इंजीनियरिंग सामान
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- रसायन और प्लास्टिक उत्पाद
👉 बाहरी सूचना-स्रोत :
भारत–रूस आर्थिक संबंधों का विस्तृत आधिकारिक अवलोकन —
Brief on India–Russia Economic Relations – Indian Embassy Moscow
2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
हालिया शिखर सम्मेलनों में भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फोकस होगा:
- केवल ऊर्जा और रक्षा पर निर्भर न रहकर व्यापार को विविध बनाना
- कृषि, खाद्य–प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, आईटी और स्टार्ट–अप क्षेत्र में नए अवसर तलाशना
- रुपया–रूबल सेटलमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाकर भुगतान की समस्या सुलझाना, ताकि पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों का असर कम हो सके।
ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा : नये रणनीतिक स्तंभ
रूस से सस्ता कच्चा तेल
यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना बढ़ाया।
- 2023–24 के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, कई महीनों में भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 20–25% के बीच रही।
इससे भारत को दो फायदे हुए:
- सस्ता कच्चा तेल मिलने से महंगाई पर काबू रखने में मदद मिली।
- भारत ने प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पादों को तीसरे देशों को निर्यात कर अतिरिक्त आय अर्जित की।
उर्वरक सहयोग : किसान को सीधा लाभ
भारत एक कृषि प्रधान देश है और उर्वरक आयात यहाँ की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
- 2024 में भारत के रूस से उर्वरक आयात का मूल्य 1.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
- हाल में भारतीय उर्वरक कंपनियाँ रूस की Uralchem समूह के साथ रूस में ही यूरिया संयंत्र लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जिससे भारत को दीर्घकालिक उर्वरक सुरक्षा मिल सकेगी।
खाद्य और कृषि व्यापार
रूस गेहूँ सहित कई कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है। आने वाले समय में दोनों देश पारस्परिक रूप से:
- अनाज, तेलहन, दालों और processed food products के व्यापार को बढ़ा सकते हैं।
- कोल्ड–चेन और लॉजिस्टिक्स में संयुक्त निवेश कर सकते हैं।
रक्षा और सुरक्षा : पारंपरिक स्तंभ, नये रूप में
प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता से ‘को–डेवलपमेंट’ पार्टनर तक
कई दशक से रूस (और पूर्व सोवियत संघ) भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है।
- 2013–17 के बीच भारत के कुल रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 64% थी।
- 2018–22 के बीच यह घटकर लगभग 45% हुई, लेकिन रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है।
पर अब रिश्ता केवल खरीदार–विक्रेता नहीं रहा, बल्कि:
- BrahMos क्रूज़ मिसाइल जैसी संयुक्त परियोजनाएँ
- फ्रिगेट, हेलिकॉप्टर और अन्य प्लेटफॉर्मों का को–प्रोडक्शन
- “Make in India” के तहत भारत में उत्पादन इकाइयों की स्थापना
हाल की रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों की कंपनियाँ रूस में और भारत में संयुक्त रक्षा उत्पादन इकाइयों और स्पेयर पार्ट्स निर्माण पर भी चर्चा कर रही हैं।
एस–400, लड़ाकू विमान और नई तकनीक
भारत ने रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद की, जो लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता को बढ़ाती है। इसके अलावा Su-30MKI, MiG-29, T-90 टैंक और कई नौसैनिक प्लेटफॉर्म रूस के सहयोग से ही भारतीय शस्त्रागार का हिस्सा बने।
आगे के नये आयाम हो सकते हैं:
- 5th generation लड़ाकू विमान तकनीक में सहयोग
- Unmanned systems (ड्रोन, UAVs)
- साइबर सुरक्षा और counter-terrorism में साझा प्रशिक्षण
संयुक्त सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग
INDRA जैसे सैन्य अभ्यास, आतंकवाद–रोधी ड्रिल्स, खुफिया जानकारी का आदान–प्रदान – यह सब भारत–रूस सुरक्षा सहयोग की गहराई को दिखाते हैं। दोनों देश अफगानिस्तान, मध्य एशिया और हिंद–प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता पर साझा चिंता रखते हैं।
कनेक्टिविटी के नये रास्ते : INSTC और चेन्नई–व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर
अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC)
International North–South Transport Corridor (INSTC) के ज़रिए भारत, रूस, ईरान और मध्य एशिया के बीच माल ढुलाई के समय और लागत में बड़ी कमी आ सकती है।
- यह कॉरिडोर भारत के बंदरगाहों से ईरान के चाबहार और बंदर अब्बास, फिर कैस्पियन सागर और रूस तक माल पहुँचाने का तेज विकल्प देता है।
- इससे न केवल भारत–रूस व्यापार बढ़ेगा, बल्कि भारत की मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच भी मजबूत होगी।
चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर
एक और महत्वपूर्ण पहल है Chennai–Vladivostok Maritime Corridor (CVMC):
- लगभग 5,600 nautical miles (10,300 किमी) का यह समुद्री मार्ग भारत के चेन्नई पोर्ट को रूस के व्लादिवोस्तोक से जोड़ेगा।
- यह मार्ग दक्षिण चीन सागर के रास्ते पूर्वी एशिया होते हुए रूस के सुदूर पूर्व (Russian Far East) तक जाता है।
- इससे कोयला, खनिज, लकड़ी, समुद्री उत्पाद और ऊर्जा संसाधन सस्ते और तेज़ी से भारत पहुँच सकेंगे।
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बहुपक्षीय मंचों पर भारत–रूस की साझेदारी
भारत और रूस कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ–साथ काम करते हैं:
- BRICS
- SCO (Shanghai Cooperation Organisation)
- G20
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंच
UNSC सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता पर रूस का समर्थन
रूस खुलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
- रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पष्ट रूप से कहा कि रूस भारत (और ब्राज़ील) को स्थायी सदस्य के रूप में देखना चाहता है।
- हाल ही की संयुक्त घोषणाओं में भी रूस ने दोबारा भारत के स्थायी सदस्यता दावे का “दृढ़ समर्थन” दर्ज किया है।
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यह समर्थन भारत–रूस राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक दृष्टिकोण की समानता का महत्वपूर्ण संकेत है।
संस्कृति, शिक्षा और People-to-People संपर्क : दोस्ती का मानवीय पक्ष
हाल के वर्षों में केवल सरकार–स्तरीय नहीं, बल्कि लोगों के बीच जुड़ाव भी बढ़ा है।
- रूस में योग, आयुर्वेद और भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता
- भारत में रूसी साहित्य, बैले, और शास्त्रीय संगीत के शौकीन
- छात्र–अदला–बदली, संयुक्त शोध कार्यक्रम और विश्वविद्यालय–स्तरीय MoU
रूसी राष्ट्रपति की हालिया भारत यात्रा के दौरान रूस से आए प्रतिनिधिमंडल का वाराणसी जैसे सांस्कृतिक केंद्रों में पारंपरिक वैदिक स्वागत, इस सांस्कृतिक निकटता का ताज़ा उदाहरण है।
इसके साथ ही, भारत ने रूस के नागरिकों के लिए 30 दिन की निःशुल्क e-tourist visa स्कीम शुरू करने की घोषणा भी की है, ताकि पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क और बढ़ सके।
नयी चुनौतियाँ : संतुलन, प्रतिबंध और व्यापार असंतुलन
मजबूत दोस्ती के बावजूद कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिनसे निपटते हुए ही भारत–रूस मित्रता को अगले स्तर पर ले जाया जा सकता है।
यूक्रेन संकट और पश्चिमी प्रतिबंध
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर अमेरिका और यूरोपीय देशों के कठोर प्रतिबंध लगे हैं।
- भारत को एक तरफ रूस के साथ पारंपरिक दोस्ती और ऊर्जा–रक्षा सहयोग बनाए रखना है,
- वहीं दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोपीय संघ और इंडो–पैसिफिक साझेदारों के साथ भी संबंध मजबूत रखने हैं।
यह “संतुलन की कूटनीति” भारत के लिए चुनौती भी है और अवसर भी – क्योंकि इससे भारत एक स्वतंत्र और स्वायत्त वैश्विक शक्ति के रूप में उभरता दिखता है।
व्यापार असंतुलन और रुपया–रूबल समस्या
जैसा कि ऊपर देखा, भारत–रूस व्यापार में भारी असंतुलन है –
- रूस से आयात लगभग 63–64 अरब डॉलर
- रूस को निर्यात केवल करीब 5 अरब डॉलर के आसपास
इस असंतुलन के कारण भारतीय बैंकों में Special Rupee Vostro Accounts (SRVAs) में अरबों रुपये फँसे हुए हैं, जिनका प्रभावी उपयोग चुनौती बना हुआ है।
यदि आधुनिक, convertibility-friendly रुपया–रूबल सेटलमेंट सिस्टम विकसित हो जाए तो:
- व्यापार भुगतान सुचारू हो सकेगा,
- छोटे–मझोले भारतीय निर्यातकों को रूस के बाजार में प्रवेश आसान होगा,
- और भारत–रूस व्यापार अधिक संतुलित रूप ले सकेगा।
भारत–रूस मित्रता के नये आयाम : भविष्य का रोडमैप
अब सवाल यह है कि आने वाले दशक में भारत–रूस मित्रता किन–किन नये क्षेत्रों में गहराई और व्यापकता हासिल कर सकती है? कुछ प्रमुख आयाम इस प्रकार हैं:
उच्च प्रौद्योगिकी और नवाचार
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग
- साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण
- स्पेस टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट नेविगेशन
दोनों देश संयुक्त R&D सेंटर्स, स्टार्ट–अप एक्सचेंज प्रोग्राम और टेक–पार्क सहयोग जैसी पहल से एक–दूसरे की strengths का लाभ उठा सकते हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और विज्ञान–प्रौद्योगिकी
हालिया समझौतों में स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन और साइंटिफिक रिसर्च में सहयोग को नया ढांचा दिया गया है —
- मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए संयुक्त प्रोग्राम
- वैक्सीन, बायोटेक और फार्मा R&D में साझेदारी
- वैज्ञानिकों की अदला–बदली और जॉइंट लैब्स
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हरित ऊर्जा और जलवायु सहयोग
- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन)
- परमाणु ऊर्जा (Kudankulam जैसे प्रोजेक्ट) के सुरक्षित और टिकाऊ विस्तार
- जलवायु परिवर्तन से निपटने में संयुक्त पहल, जैसे आर्कटिक रिसर्च और पर्यावरण–अनुकूल तकनीकें
ई–कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और डाक–सहयोग
भारत और रूस के बीच डिजिटल भुगतान, फिनटेक, और cross-border e-commerce में सहयोग तेजी से उभरता क्षेत्र है।
- भारत के UPI जैसे मॉडल और रूस के MIR भुगतान नेटवर्क के बीच इंटरऑपेरबिलिटी पर काम किया जा सकता है।
- हालिया MoU के जरिए दोनों देशों की डाक सेवाएँ ई–कॉमर्स डिलीवरी और छोटे–मझोले उद्यमों को सपोर्ट करने के लिए मिलकर काम कर रही है|
निष्कर्ष : भरोसेमंद दोस्ती के नए अध्याय
संक्षेप में, भारत–रूस मित्रता ऐतिहासिक भरोसे, रणनीतिक समानता और परस्पर हितों पर आधारित है।
- इतिहास ने साबित किया है कि संकट के समय दोनों देश एक–दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।
- आज जब विश्व व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है, भारत और रूस ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, विज्ञान, शिक्षा और उच्च तकनीक के क्षेत्रों में नये–नये आयाम जोड़ रहे हैं।
- चुनौतियाँ – जैसे व्यापार असंतुलन, पश्चिमी प्रतिबंध और भू–राजनीतिक दबाव – मौजूद हैं, लेकिन इन्हीं के भीतर सहयोग के नये अवसर भी छिपे हैं।
यदि दोनों देश विविधीकरण, नवाचार और people-to-people संपर्क पर जोर देते रहें, तो यह मित्रता आने वाले दशकों में भी भारत की विदेश नीति का “मुख्य स्तंभ” बनी रहेगी और बहुध्रुवीय, संतुलित विश्व व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी|
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