Contents
- 1 अर्थव्यवस्था और बाजार : भारत की बदलती तस्वीर
- 1.1 क्या है भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिति?
- 1.1.1 दिनांक ७ सप्टेंबर २०२५|लेख |
- 1.1.2 भूमिका—
- 1.1.3 1. अर्थव्यवस्था की परिभाषा एवं महत्व—
- 1.1.4 2. भारतीय अर्थव्यवस्था का ऐतिहासिक परिदृश्य—-
- 1.1.5 3. वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति—
- 1.1.6 4. भारतीय बाजार की विशेषताएँ—
- 1.1.7 5. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार—-
- 1.1.8 6. शहरी अर्थव्यवस्था और बाजार—
- 1.1.9 7. भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ—-
- 1.1.10 8. अवसर और संभावनाएँ—-
- 1.1.11 9. सरकार की प्रमुख पहलें—-
- 1.1.12 10. भविष्य की राह—-
- 1.1.13 निष्कर्ष—-
- 1.1.14 About The Author
- 1.1 क्या है भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिति?
अर्थव्यवस्था और बाजार : भारत की बदलती तस्वीर
क्या है भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिति?
दिनांक ७ सप्टेंबर २०२५|लेख |
“भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की बदलती तस्वीर: इतिहास, वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ एवं भविष्य की संभावनाएँ। जानिए कैसे भारत बन रहा है आर्थिक शक्ति। या फिर नहीं? “
भूमिका—
भारत की अर्थव्यवस्था एवं बाजार हमेशा से ही चर्चा का विषय रहे हैं। कभी खेती-किसानी पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में चर्चा तथा किसानों के आंदोलन | तो कभी उद्योगों और सेवा क्षेत्र पर आधारित आधुनिक अर्थव्यवस्था पर घमासान चर्चा |लेफ्टिस्ट तथा राईटिस्ट विचारों में टकराव | भारतत ने हर दौर में परिवर्तन देखा है। आज का भारत एक उभरती हुई शक्ति है, (लेकीन?) जहाँ गाँव से लेकर शहर तक हर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बाजार से जुड़ा हुआ है। इस लेख में हम भारत की अर्थव्यवस्था एवं बाजार की संरचना,उसका विकास,सामने खडी चुनौतियाँ तथा भविष्य की संभावनाएँ विस्तार से समझेंगे।
1. अर्थव्यवस्था की परिभाषा एवं महत्व—
🔻अर्थव्यवस्था (Economy) वह व्यवस्था होती है जिसके अंतर्गत कोई देश उत्पादन करता है, वितरण करता है और उपभोगभी करता है।
🔻यह लोगों की आय, रोजगार, निवेश, उद्योग और व्यापार से जुड़ा फिनामेना होता है।
🔻आज दुनिया में किसी भी देश की ताकत उसकी मजबूत अर्थव्यवस्था से मापी जाती है।
🔻आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) से सरकार की आय बढ़ती है | उसके साथ जनता का जीवनस्तर (Standard of Living) भी ऊँचा होता है।
2. भारतीय अर्थव्यवस्था का ऐतिहासिक परिदृश्य—-
1. प्राचीन भारत –भारत एक समय विश्व की “सोने की चिड़िया” कहलाता था। मसाले, वस्त्र, हस्तशिल्प तथा कृषि भारत की पहचान थी।
2. औपनिवेशिक काल – अंग्रेज़ शासन ने भारत की अर्थव्यवस्था को कच्चा माल सप्लाई करने वाला बना दिया। इससे घरेलू और अन्य उद्योग ध्वस्त हुए और गरीबी बढ़ गई ।
3. स्वतंत्रता के बाद – 1947 के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई थी | जिसमें सरकारी क्षेत्र (Public Sector) तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) दोनों को समान महत्व दिया गया था|लेकिन बाद में नई व्यवस्था अपनाई गयी|जिसे आजारी करण, निजीकरण और वैश्वीकरण का नाम दिया गया |
4. 1991 के बाद – उसका प्रारंभ 1991 से शुरुआत हुआ|इसे उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG Reforms) कहा जाता है। इस पोलिसी ने भारत के बाजार की तस्वीर बदल दी। विदेशी निवेश बढ़ा, IT और सेवा क्षेत्र का तेज़ी से विकास हुआ। संपत्ती का केंद्रीकरण हुआ। आर्थिक विषमता बढ़ गई ।
3. वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति—
🔻भारत आज विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालाकी डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे ,’डेड इकानामी’ बताया है।
🔻 (सकल घरेलू उत्पाद) लगातार बढ़ रहा है।यह अमेरिका ने लगाये टेरिफ के बाद स्पष्ट रुप से सुचित हुआ है की भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना जरुरी है।
🔻कृषि क्षेत्र अभी भी लगभग 45% लोगों को रोजगार देती है। इसमे आधुनिक तकनिक का उपयोग करना जरुरी है। जादा से जादा उपजाऊ जमीन का उपयोग करना जरुरी है। भारी मात्रा में ऊपजाऊ जमीन पर कुछ काम नहीं होता है। जमीन कानुनी झगडों के कारण उपज नहीं कर पायी है। एक व्यापक सिंचन व्यवस्था की जरुरी भी है।
🔻सेवा क्षेत्र जैसे IT, बैंकिंग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा,आदी देश की GDP में सबसे बड़ा योगदान करता है। उसका और विकास जरुरी है।
🔻मैन्युफैक्चरिंग तथा “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों से उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है।लेकिन ते सिर्फ कागज पर दिखना ठिक नहीं है | लोगो के जीवनस्तर में दिखना जरुरी है।
4. भारतीय बाजार की विशेषताएँ—
1. विविधता –आज के दौर में यहाँ ग्रामीण हाट से लेकर शॉपिंग मॉल तक सब मौजूद हैं।
2. जनसंख्या बल – 140 करोड़ से अधिक लोगों का विशाल उपभोक्ता वर्ग भारत में है ।ये देश की ताकत भी बन सकता है। कमजोरी भी बन सकता है। अगर अमिरी और गरीबी के बीच की तफावत बड़ी होती है।
3. डिजिटल क्रांति – भारत में आज UPI, Paytm, Google Pay जैसे माध्यमों ने नकद लेन-देन की जगह ले ली है।
4. ऑनलाइन बाजार – Amazon, Flipkart, Meesho, Jiomart जैसे ई-commerce प्लेटफॉर्म ने नए अवसर भी देश में खोले हैं।
5. MSME का योगदान – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) भारतीय बाजार की रीढ़ बनी जा रही हैं।
5. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार—-
🔻भारत की 65% आबादी गाँवों में रहती है।
🔻ग्रामीण बाजार कृषि उपज, दूध, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योगों पर आधारित है।
🔻सरकारी योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं।
🔻आज गाँवों में भी मोबाइल, इंटरनेट तथा डिजिटल बैंकिंग की पहुँच होने से बाजार की संभावनाएँ और बढ़ गई हैं।
6. शहरी अर्थव्यवस्था और बाजार—
🔻शहरी क्षेत्रों में उद्योग, सेवाएँ, रियल एस्टेट और आधुनिक व्यापार प्रमुख उपस्थिती दर्शाते हैं।
🔻महानगरों में मॉल, सुपरमार्केट, कॉर्पोरेट ऑफिस तथा स्टार्टअप कल्चर तेजी से विकसित हो रहे हैं।
🔻 और BPO सेक्टर ने लाखों युवाओं को रोजगार भी दिया है। लेकीन जनसंख्या के अनुपात में कम ही है। बडी संख्या में बेरोजगार युवा मौजूद हैं।
🔻शहरी बाजार में उपभोक्ता अधिक खर्च करने को तैयार होते हैं,लेकिन इससे विदेशी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलता है।
7. भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ—-
1. बेरोजगारी – जनसंख्या अधिक है, लेकिन रोजगार के अवसर सीमित हैं।
2. गरीबी तथा असमानता – आर्थिक वृद्धि सब तक समान रूप से नहीं पहुँची है।
3. कृषि संकट – किसानों की आय अपेक्षाकृत कम है, खेती लागत बढ़ रही है।
4. मुद्रास्फीति (Inflation) – रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।
5. आयात पर निर्भरता – पेट्रोलियम तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।
6. अर्थव्यवस्था में अनौपचारिक क्षेत्र – श्रमिक बड़ी संख्या में लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। जहाँ सामाजिक सुरक्षा नहीं होती।न किसी और सुरक्षा है।
8. अवसर और संभावनाएँ—-
1. स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया – युवाओं को उद्यमिता (Entrepreneurship) के अवसर देने का प्रयास करती है। पर इसके बारे में जागरूकता तथा प्रशासन में भ्रष्टाचार और पक्षपात दिखाई देता है।
2. डिजिटल इंडिया – हर गाँव में इंटरनेट पहुँचाकर e-governance और e-commerce को बढ़ावा ज रहा है। लेकिन इसकी गती कम है। इसका प्रमुख कारण गरीबी और शिक्षा है।
3. हरित ऊर्जा (Green Energy) – सौर और पवन ऊर्जा में भारत बड़ा निवेश कर रहा है।लेकिन उसके परिणाम आने बाकी है।
4. वैश्विक व्यापार – भारत दुनिया के बड़े देशों के लिए एक आकर्षक बाजार है। इसका प्रमुख कारण जनसंख्या है। और राजनीतिक रुप से डेमोक्रसी और उदारता ,सुरक्षितता भी है।
5. जनसंख्या लाभ (Demographic Dividend) – बड़ी संख्या में युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन उसके हाथ को काम मिलना जरुरी है।
9. सरकार की प्रमुख पहलें—-
📌आत्मनिर्भर भारत अभियान
📌 (वस्तु एवं सेवा कर)
📌मेक इन इंडिया
📌डिजिटल इंडिया
📌प्रधानमंत्री जनधन योजना
📌स्टार्टअप इंडिया
इन योजनाओं ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और बाजार को आधुनिक बनाया है।
10. भविष्य की राह—-
🔻भारत का भविष्य उसकी आर्थिक नीतियों तथा बाजार की दिशा पर निर्भर करेगा।
🔻यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी ढाँचे पर जोर दिया गया तो भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
🔻 Robotics, EV (इलेक्ट्रिक वाहन) ,AI जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से रोजगार और विकास दोनों बढ़ेंगे।
🔻ग्रामीण और शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाओं का संतुलित विकास आवश्यक है।
निष्कर्ष—-
भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार एक गतिशील यात्रा पर हैं। चुनौतियाँ अनेक हैं, लेकिन अवसर उससे कहीं अधिक। यदि सरकार, उद्योग, किसान, मजदूर और आम नागरिक मिलकर काम करें, तो भारत आने वाले दशक में न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होगा।
अधिक जानकारी पायें निचे दिए लिंकपर क्लिक करके••••
1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) – https://www.rbi.org.in
2. नीति आयोग – https://www.niti.gov.in
3. भारत सरकार – आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट – https://www.indiabudget.gov.in
4. विश्व बैंक (World Bank) – India Economy Overview – https://www.worldbank.org/en/country/india/overview
5. IMF (International Monetary Fund) – India Data – https://www.imf.org/en/Countries/IND
6. Invest India (सरकारी निवेश पोर्टल) – https://www.investindia.gov.in
और हिंदी लेख पढें…..
HindiLekH.blog – शब्दों की शक्ति, विचारों की गहराई |

1 thought on “अर्थव्यवस्था और बाजार : भारत की बदलती तस्वीर”