Contents
- 1 Javed Akhtar vs Mufti Shamail : मुस्लिम विद्वानो मे बडी बहस!
- 1.1 भगवान है या नहीं?
- 1.2 🔴 प्रस्तावना : एक बहस, जो सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं
- 1.3 🧠 बहस का बैकग्राउंड : मामला शुरू कहां से हुआ?
- 1.4 📊 आस्था और नास्तिकता : आंकड़े क्या कहते हैं?
- 1.5 🔬 विज्ञान क्या कहता है?
- 1.6 🕌 धर्म क्या कहता है? (इस्लामी संदर्भ)
- 1.7 🧩 असली टकराव कहां है?
- 1.8 🧮 लॉजिक का इस्तेमाल करें (Simple Example)
- 1.9 🌾 ग्रामीण–शहरी दृष्टांत (Marathi Touch)
- 1.10 ✍️ कोट्स जो सोचने पर मजबूर करें
- 1.11 🔚 निष्कर्ष : भगवान से बड़ा सवाल — इंसान
- 1.12 ❓ FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
- 1.13 🔗 और पढे :(Links)
Javed Akhtar vs Mufti Shamail : मुस्लिम विद्वानो मे बडी बहस!
भगवान है या नहीं?
“भगवान है या नहीं?” – आस्था, तर्क और विज्ञान के बीच बड़ी बहस”
(www.hindilekh.blog का विशेष, शोध-आधारित, जागरूकता लेख)
” Javed Akhtar vs Mufti Shamail की बहस के संदर्भ में “भगवान है या नहीं?” इस सवाल पर आधारित यह शोधपूर्ण लेख आस्था, विज्ञान, तर्क और मानवता के बीच संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सरल भाषा, आंकड़े, उदाहरण और इंसानी लहजे में लिखा गया यह लेख जागरूकता के लिए है।”
🔴 प्रस्तावना : एक बहस, जो सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं
हाल के समय में Javed Akhtar और Mufti Shamail के बीच “भगवान है या नहीं?” इस सवाल पर हुई बहस ने सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक चर्चाओं का तूफ़ान खड़ा कर दिया।
यह बहस सिर्फ़ एक शायर बनाम एक धार्मिक विद्वान की नहीं है,
बल्कि यह टकराव है —
- आस्था बनाम तर्क
- धर्म बनाम विज्ञान
- विश्वास बनाम सवाल
और सबसे अहम बात —
👉 सोचने के अधिकार की।
🧠 बहस का बैकग्राउंड : मामला शुरू कहां से हुआ?
Javed Akhtar खुले तौर पर खुद को नास्तिक (Atheist) मानते हैं।
उनका तर्क है:
“अगर भगवान है, तो इतनी नाइंसाफी क्यों?”
वहीं Mufti Shamail जैसे इस्लामी विद्वान मानते हैं:
“ईश्वर पर सवाल उठाना इंसानी समझ की सीमा से बाहर है।”
यहीं से बहस शुरू होती है।
📊 आस्था और नास्तिकता : आंकड़े क्या कहते हैं?
🌍 वैश्विक स्तर पर (Pew Research, World Values Survey)
- दुनिया की ~84% आबादी किसी न किसी धर्म को मानती है
- ~16% लोग खुद को नास्तिक / अज्ञेयवादी कहते हैं
- विकसित देशों में नास्तिकता ज़्यादा
- विकासशील देशों में धार्मिक आस्था ज़्यादा
🇮🇳 भारत में स्थिति
- ~97% लोग किसी न किसी रूप में ईश्वर में विश्वास करते हैं
- ~0.3–0.5% खुद को नास्तिक कहते हैं
- शहरी, पढ़े-लिखे वर्ग में सवाल ज़्यादा
- ग्रामीण भारत में आस्था जीवन का हिस्सा
👉 मतलब: सवाल पूछना अल्पसंख्यक प्रवृत्ति है, पर ज़रूरी है।
🔬 विज्ञान क्या कहता है?
विज्ञान का मूल मंत्र है:
“जब तक सबूत न हो, तब तक मान्यता नहीं।”
- विज्ञान भगवान को नकारता नहीं,
- बस यह कहता है कि ईश्वर विज्ञान का विषय नहीं है।
Albert Einstein का प्रसिद्ध कथन:
“Science without religion is lame, religion without science is blind.”
(यहां “religion” से उनका मतलब नैतिकता और विस्मय से था, अंधविश्वास से नहीं)
🕌 धर्म क्या कहता है? (इस्लामी संदर्भ)
इस्लाम में —
- ईश्वर (अल्लाह) को अदृश्य लेकिन सर्वशक्तिमान माना गया है
- सवाल पूछने की इजाज़त है, लेकिन
- नियत (Intent) पर ज़ोर है
Mufti Shamail का तर्क:
- ईश्वर को प्रयोगशाला में साबित नहीं किया जा सकता
- आस्था तर्क से ऊपर होती है
🧩 असली टकराव कहां है?
टकराव भगवान के अस्तित्व से ज़्यादा, इन बातों पर है:
- क्या सवाल पूछना गुनाह है?
- क्या धर्म आलोचना से ऊपर है?
- क्या नास्तिक होना अनैतिक है?
Javed Akhtar कहते हैं:
“मैं ईश्वर को नहीं मानता, लेकिन इंसानियत को मानता हूं।”
यहां बहस धर्म बनाम अधर्म की नहीं,
👉 मानवता बनाम कट्टरता की हो जाती है।
🧮 लॉजिक का इस्तेमाल करें (Simple Example)
अगर —
- दो लोग बीमार हों
- एक दुआ करे, दूसरा दवा ले
- ठीक दोनों हो जाएं
तो सवाल:
- क्या दुआ से ठीक हुआ?
- या शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया से?
विज्ञान कहेगा — Natural Healing
धर्म कहेगा — ईश्वर की कृपा
👉 सच्चाई शायद बीच में कहीं है।
🌾 ग्रामीण–शहरी दृष्टांत (Marathi Touch)
ग्रामीण कहावत:
“भगवान को इन्सान ने बनाया”
शहरी जोक:
“भगवान पर भरोसा रखो,
लेकिन पासवर्ड खुद बदलो!”
👉 आस्था और अक्ल दोनों ज़रूरी हैं।
✍️ कोट्स जो सोचने पर मजबूर करें
- Kabir:
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय…” - Javed Akhtar:
“मैं सवाल करता हूं, क्योंकि मुझे जवाब चाहिए।”
🔚 निष्कर्ष : भगवान से बड़ा सवाल — इंसान
यह बहस जीत-हार की नहीं है।
यह बहस है —
- सोचने की आज़ादी की
- सवाल पूछने के हक़ की
- और इंसान बने रहने की
भगवान को मानना या न मानना — निजी चुनाव है।
लेकिन किसी पर विचार थोपना — ख़तरा है।
❓ FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या नास्तिक होना ग़लत है?
➡️ नहीं। संविधान विचार की आज़ादी देता है।
Q2. क्या धर्म सवालों से डरता है?
➡️ नहीं, लेकिन कट्टरता सवालों से डरती है।
Q3. क्या विज्ञान भगवान को नकारता है?
➡️ नहीं, विज्ञान सिर्फ सबूत मांगता है।
🔗 और पढे :(Links)
- Pew Research (Religion & Atheism): https://www.pewresearch.org
- World Values Survey: https://www.worldvaluessurvey.org
- Science & Religion Debate: https://plato.stanford.edu
✨ अंतिम बात
“भगवान होगा या नहीं|इन्सान ने अच्छा इन्सान बनना जरुरी है|
यही इस बहस का असली निचोड़ है।
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