Contents
छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम क्यों आज की डेमोक्रासी के बावजुद याद दिलाता है?
मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज देश की विरासत !
दिनांक- २४ सप्टेंबर २०२५ | लेख |
“छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य का इतिहास, उनकी सैन्य रणनीतियाँ, प्रशासनिक नीतियाँ, किले और संस्कृति पर विस्तृत जानकारी। जानिए कैसे शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य को मजबूत और न्यायप्रिय बनाया।”
भारतीय इतिहास में ‘मराठा साम्राज्य’ का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साम्राज्य 17 वीं शताब्दी में अस्तित्व में आने लगा | छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में एक मजबूत एवं संगठित राज्य के रूप में शुरु हुआ। मराठा प्रदेशवाचक नाम है। मराठी भाषा बोलनेवाले एवं उनके प्रदेश को ‘मराठा’ कहा गया है। मराठा साम्राज्य जातिविशेष का नहीं था |इन लोगों का अपने ,’भुमिपुत्रों का ,’स्वराज्य‘ बनाना और मुगल या किसी का गुलाम ना रहकर अपने फैसले खुद के हाथों में लेने का आंदोलन था | यानी एक स्वतंत्रता का आंदोलन था |इस साम्राज्य ने आगे जाकर तत्कालीन राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया। भारतीय प्रशासन, सैन्य नीति तथा संस्कृति पर भी अमिट छाप छोड़ी।
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1630 ईस्वी में महाराष्ट्र में पुणे जिथे में शिवनेरी किले पर हुआ था। वे एक साहसी, दूरदर्शी तथा न्यायप्रिय नेता | जिन्होंने मराठा साम्राज्य की नींव रखी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। उसी समय चारों दिशाओं मुगल तथा अन्य विदेशी मुल के शासकों का शासन उत्तर और दक्षिण भारत (आज के ) में शासन था|ऐसे स्थिती में एक राज्य की स्थापना करना और कयी जातीयों में बटे मराठा लोगों को में एक लक्ष के लिए एकत्र लाना बडा कठीण काम था|छत्रपती शिवाजी महाराज एक ही ऐसा नेता थे जिन्होंने ये काम करके दिखाया | राज्य का निर्माण और समाज में समता प्रस्थापित करने का काम किया।ये बहुत कठिण काम आज भी लगता है। लेकिन १७ वे सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने किया था|
• मराठा साम्राज्य की स्थापना—
• प्रारंभिक संघर्ष और किले—
शिवाजी महाराज ने युवा अवस्था से ही युद्ध और किलेबंदी की कला में दक्षता हासिल की थी। उनके पिता शहाजी भोसले तथा दादा मालोजी भोसले से उन्हें प्रशासन, युद्धनीति आदी की प्रारंभिक शिक्षा मिली ।
शिवाजी महाराज ने सिंहगड , रायगड जैसे महत्वपूर्ण किलों को जीतकर अपने साम्राज्य की नींव रखी। इन किलों ने मराठाओं को रणनीतिक लाभ प्रदान किया और मुगलों और अन्य शासकों के खिलाफ एक मजबूत रक्षा दी।
• स्वतंत्र राज्य ,’स्वराज्य’ की स्थापना—
1645 के बाद शिवाजी महाराज ने अपने प्रशासनिक तथा सैन्य कौशल से स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना की। उन्होंने छोटे-छोटे गढ़ों और किलों को जोड़कर एक मजबूत नेटवर्क बनाया। इस समय के दौरान उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, भूमि प्रणाली और कर संग्रह जैसी व्यवस्थाओं की नींव रखी।
• सैन्य संगठन और युद्धनीति—
• मराठा सेना—
शिवाजी महाराज की सेना बहुप्रतिभाशाली और सुव्यवस्थित थी। इसमें पैदल सेना, घुड़सवार सेना और नौसेना तक शामिल थे। खुपिया यंत्रणा भी थी| उनका दृष्टिकोण था कि केवल शक्ति से नहीं बल्कि रणनीति तथा गति से ही विजय संभव है। आधुनिक रणनिती को भी चौकाने वाले कयी लयी लडाईया,युद्ध एवं ‘ऑपरेशन ‘उन्होंने किए | योजनाबद्ध तरीके से औरंगजेब से भेंट और वहा से औरंगजेब की सेना को चकमा देकर 5 हजार सैनिको से निकलकर वापस 5 हजार सैनिकों साथ वापस आना एक बडा प्लॅन और उसपर अंमल करनेवाले उनके सेनिक ,’मोसाद’ को पिछे छोड देने के काबिल माने जा सकते हैं।ये 5 हजार सेनिक रास्ते मे नियोजित जगह पर बिखरे और फिर जगह जगह पर नियोजनपुर्वक इकठ्ठा आकर काम कर के ,’फतेह‘ कर लिये थे |
• गुप्त युद्धनीति—–
शिवाजी महाराज ने ‘गोरिल्ला युद्ध तंत्र और रात्रि हमलों जैसी युद्धनीतियों का कुशलता से प्रयोग किया। उन्होंने दुश्मनों को भ्रमित करने के लिए छोटे दलों में अचानक हमला करने की नीति अपनाई। इससे मुगलों और आदिलशाही जैसे बड़े राज्यों को भी चुनौती मिली।
• प्रशासन और न्याय—-
शिवाजी महाराज ने अपने राज्य में कठोर लेकिन न्यायप्रिय प्रशासन स्थापित किया।
• 1. पंचायती व्यवस्था: प्रत्येक गांव में न्याय व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया।
• 2. कर प्रणाली: किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए उचित कर प्रणाली लागू की। जितनी उपज हो जाए उतना ही कर लेना शुरु किया।
• 3. सैनिक और नागरिक सुरक्षा: राज्य के भीतर कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए किले और चौकियाँ बनाई।
इन व्यवस्थाओं ने मराठा साम्राज्य को न केवल मजबूत बनाया बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन को भी हासिल किया।
• संस्कृति और कला में योगदान—-
शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि संस्कृति तथा कला के संरक्षक भी थे।
• उन्होंने मंदिरों का निर्माण और संरक्षण किया।धर्मनिरपेक्षता का संरक्षण किया।
• मराठी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए, ‘मराठी शब्दकोश‘ का निर्माण किया।
• राज्य में सामाजिक सुधार और न्याय की नींव रखी। सभी जातीयों को प्रतिनिधित्व दिया। पद ,सन्मान दीये | स्रियाओं का सन्मान किया।
• उनकी नीति थी कि सैन्य शक्ति और संस्कृति दोनों साथ-साथ विकसित हों।
शिवाजी महाराज के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी संभाजी महाराज , राजाराम और शाहू महाराज , उनके सरदारोंने साम्राज्य का विस्तार उत्तर और दक्षिण में किया।
• मराठा साम्राज्य दक्षिण और उत्तर भारत में फैला।
• उन्होंने मुगलों और आदिलशाही के खिलाफ राजनीतिक और सैन्य युद्ध जारी रखे।
• साम्राज्य की नींव पर स्थायी प्रशासन और कर प्रणाली विकसित हुई।
• निष्कर्ष—
छत्रपति शिवाजी महाराज का योगदान आज भी भारतीय इतिहास में प्रेरणास्रोत है। मराठा साम्राज्य ने दिखाया कि सैन्य कौशल, न्यायप्रिय प्रशासन और सांस्कृतिक संरक्षण से एक मजबूत राज्य का निर्माण संभव है।
उनकी दूरदर्शिता और साहस ने न केवल मराठा साम्राज्य को मजबूत किया, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक प्रशासन पर भी गहरा प्रभाव डाला। भारत लोगों के लिए प्रेरणा आज भी मिलती है।
अधिक जानकारी केला लिए पुढे>>>
1. छत्रपति शिवाजी महाराज – Wikipedia
2. मराठा साम्राज्य – Wikipedia
3. महाराष्ट्र पर्यटन – किले और धरोहरें
4. भारतीय इतिहास – National Portal
5. Indian History at Britannica
और हिंदी लेख पढ़ें >>>
HindiLekH.blog – शब्दों की शक्ति, विचारों की गहराई |
भारत का इतिहास और विरासत जाने ‘हिंदीलेख’ में !
धर्म और दर्शन : जीवन की राह दिखाने वाले दो आधारस्तंभ

3 thoughts on “छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम क्यों आज की डेमोक्रासी के बावजुद याद दिलाता है?”